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दुनिया के टॉप 5 देश और उनके खतरनाक मिलिट्री रोबोट्स: कौन है आगे

AI वॉरफेयर में चीन अकेला नहीं है। अमेरिका, रूस, इज़राइल और अन्य देश भी खतरनाक मिलिट्री रोबोट्स और AI तकनीक पर काम कर रहे हैं। जानिए ग्लोबल डिफेंस रोबोटिक्स का भविष्य

Global Military Robotics Image Credit: Freepik (Representational Photo)

दुनिया की महाशक्तियाँ — खासकर अमेरिका, रूस, और इज़राइल — वर्षों से 'Intelligent War' की तैयारी कर रही हैं। इन देशों ने ऐसे रोबोट और AI सिस्टम विकसित किए हैं जो भविष्य में युद्ध के मैदान को पूरी तरह बदल सकते हैं।

आइए जानते हैं, रक्षा रोबोटिक्स (Defense Robotics) के क्षेत्र में दुनिया के कुछ प्रमुख देश क्या बना रहे हैं और उनकी टेक्नोलॉजी कितनी एडवांस है।

The US: Leader in Unmanned Systems

संयुक्त राज्य अमेरिका लंबे समय से मानवरहित प्रणालियों (Unmanned Systems) का सबसे बड़ा डेवलपर रहा है। उनका लक्ष्य ऐसे रोबोट्स बनाना है जो न केवल निगरानी कर सकें, बल्कि जोखिम भरे मिशन को भी सफलतापूर्वक पूरा कर सकें।

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  • Boston Dynamics (BigDog/LS3): ये रोबोट दुर्गम इलाकों में सैनिकों के लिए भारी उपकरण और गोला-बारूद ले जाने में मदद करते हैं। चार पैरों वाला इनका डिज़ाइन संतुलन बनाए रखने में सक्षम होता है।
  • Autonomous Drones (स्काईहॉक): अमेरिका ऐसे ड्रोन सिस्टम पर काम कर रहा है जो AI की मदद से दुश्मन के ठिकानों की पहचान कर सटीक निशाना लगा सकें, जिसमें इंसानी हस्तक्षेप बहुत कम होता है।
  • Robotic Combat Vehicle (RCV): अमेरिकी सेना ज़मीन पर ऐसे रोबोटिक वाहनों का परीक्षण कर रही है जो टैंक और बख्तरबंद गाड़ियों की जगह ले सकते हैं।

Russia: Focusing on Ground Robots

रूस की डिफेंस टेक्नोलॉजी पारंपरिक रूप से ज़मीनी युद्ध और सैन्य रोबोटिक्स पर केंद्रित रही है। वे ऐसे रोबोट बनाने पर ज़ोर दे रहे हैं जो टैंकों को सपोर्ट दे सकें या खतरनाक जगहों पर जा सकें।

  • Uran-9: यह रूस का प्रसिद्ध लड़ाकू रोबोट है, जो एंटी-टैंक मिसाइल, मशीन गन और ऑटोमेटिक कैनन से लैस होता है। इसे शहरी युद्ध और टोही मिशन के लिए बनाया गया है।
  • Marker: यह AI-आधारित रोबोटिक प्लेटफॉर्म है, जो autonomously काम कर सकता है और अन्य रोबोट्स के साथ मिलकर मिशन पूरा करने की क्षमता रखता है।

Israel: Pioneering Surveillance Robotics

इज़राइल निगरानी और बॉर्डर सुरक्षा के लिए रोबोटिक्स का सबसे अधिक उपयोग करने वाले देशों में से एक है। यहां के रोबोट छोटे, तेज़ और AI-संचालित होते हैं।

  • Guardium: यह एक स्वायत्त सुरक्षा वाहन है जो सीमाओं और सैन्य ठिकानों की गश्त करता है। यह खुद रास्ता खोज सकता है और संदिग्ध गतिविधियों का पता लगा सकता है।
  • AI-Driven Border Control: इज़राइल AI को अपने सुरक्षा सिस्टम में इंटीग्रेट कर रहा है, जिससे लक्ष्य निर्धारण अधिक सटीक हो जाता है और मानवीय गलतियाँ कम होती हैं।

Global Race in AI Warfare Technology

इन बड़े देशों के अलावा कई और देश भी इस तकनीकी दौड़ में शामिल हैं:

  • दक्षिण कोरिया: इसने सैमसंग द्वारा बनाए गए SGR-A1 जैसे रोबोटिक सेंट्री गन्स तैयार किए हैं जो बॉर्डर निगरानी संभालते हैं।
  • यूके: ब्रिटेन AI असिस्टेंट, मानवरहित हवाई वाहन और अन्य डिफेंस रोबोटिक्स तकनीकों को अपनी सेना में अपनाने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है।

इसमें कोई संदेह नहीं कि मिलिट्री रोबोटिक्स का भविष्य AI पर निर्भर करता है। ये टेक्नोलॉजी सैनिकों की जान बचाने और मिशन की सफलता दर बढ़ाने में मदद कर सकती हैं, लेकिन साथ ही यह एक नैतिक बहस भी खड़ी करती है — क्या मशीनों को युद्ध में जीवन-मरण के फैसले लेने का अधिकार होना चाहिए? चीन, अमेरिका, रूस और इज़राइल जैसे देशों की प्रगति दिखाती है कि 'इंटेलिजेंट वॉरफेयर' अब दूर का सपना नहीं, बल्कि एक हकीकत है जिस पर हर देश को ध्यान देना होगा।

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Parul

Parul एक टेक राइटर और कंटेंट एडिटर हैं। वह स्मार्टफोन लॉन्च, ऐप्स की उपयोगिता और नए टेक फीचर्स को अपने शब्दों में सरल तरीके से समझाती हैं

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